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हरियाणा मानवाधिकार आयोग की पहल रंग लाई: बंधुआ मजदूरी के शिकार किशोर को मिला ₹10 लाख का मुआवजा

डेयरी फार्म में जबरन मजदूरी, हादसे में गंवाया हाथ; आयोग की सिफारिश पर सरकार ने सामान्य सीमा से पांच गुना अधिक राहत राशि दी

चंडीगढ़, 26 जून 2026। हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) के हस्तक्षेप से बंधुआ मजदूरी और गंभीर शोषण का शिकार हुए 15 वर्षीय किशोर को बड़ी राहत मिली है। आयोग की अनुशंसा पर हरियाणा सरकार ने पीड़ित को ₹10 लाख का मुआवजा स्वीकृत किया है। यह राशि सामान्य मुआवजा सीमा से कहीं अधिक है और मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष अनुमति के तहत प्रदान की गई है।

अखबार की खबर पर आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान

यह मामला तब सामने आया जब एक समाचार रिपोर्ट में बिहार के किशनगंज निवासी नाबालिग की दर्दनाक आपबीती प्रकाशित हुई। रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कराई।

जांच में सामने आया कि किशोर बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर अपने साथियों से बिछड़ गया था। आरोप है कि एक व्यक्ति ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपने साथ ले जाकर डेयरी फार्म में दो महीने से अधिक समय तक बंधुआ मजदूरी कराई।

खतरनाक मशीन चलाते समय हुआ हादसा

डेयरी फार्म में किशोर से चारा काटने वाली मशीन सहित कई जोखिमपूर्ण कार्य कराए गए। इसी दौरान मशीन की चपेट में आने से उसका बायां हाथ कोहनी के नीचे से कट गया।

आरोप है कि दुर्घटना के बाद उसे तत्काल इलाज उपलब्ध कराने के बजाय सुनसान स्थान पर छोड़ दिया गया। गंभीर हालत में वह किसी तरह नूंह पहुंचा, जहां एक शिक्षक ने उसकी मदद कर उपचार और पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित कराई।

मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला

आयोग ने अपनी जांच में पाया कि यह मामला बाल शोषण, बंधुआ मजदूरी और मानव गरिमा के उल्लंघन से जुड़ा है। आयोग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और 23 के साथ-साथ बाल अधिकारों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का उल्लेख करते हुए जिला प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग और बाल संरक्षण एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

एफआईआर के बाद अदालत में पहुंचा मामला

जांच के आधार पर 10 अगस्त 2025 को जीआरपी बहादुरगढ़ थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। फिलहाल मामला न्यायिक विचाराधीन है।

स्थायी विकलांगता को देखते हुए मिली विशेष राहत

14 मई 2026 को हुई सुनवाई में आयोग ने माना कि किशोर स्थायी विकलांगता का शिकार हो चुका है और उसके पुनर्वास, कृत्रिम अंग तथा दीर्घकालिक चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है।

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा-18 के तहत आयोग ने पीड़ित को ₹10 लाख का मुआवजा देने की अनुशंसा की, जिसे हरियाणा सरकार ने 16 जून 2026 को मंजूरी दे दी।

सामान्य सीमा से पांच गुना अधिक मुआवजा

हरियाणा विक्टिम कम्पेंसेशन स्कीम, 2020 के तहत ऐसे मामलों में अधिकतम ₹2 लाख तक का मुआवजा निर्धारित है। हालांकि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने विशेष छूट देते हुए ₹10 लाख की सहायता राशि स्वीकृत की।

जांच टीम के प्रयासों की सराहना

आयोग ने मामले का खुलासा करने और पीड़ित तक समय पर पहुंचने में पुलिस की भूमिका की भी प्रशंसा की है। पुलिस अधीक्षक नितिका गहलौत (IPS) को प्रशंसा-पत्र जारी किया गया है, जबकि जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश को सम्मानित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।

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