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भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने नहीं खाली की सरकारी कोठी, देना पड़ेगा लाखों रुपए जुर्माना ।

एमडब्ल्यूबी न्यूज, चंडीगढ़ । हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकारी मकान खाली करने के लिए मिली समय अवधि समाप्त होने के बाद भी मकान खाली नहीं किया है। ऐसे में अब उन पर पीनल रेंट लगना शुरू हो गया है। पीडब्ल्यूडी विभाग के नियमों के तहत पीनल रेंट हर महीने बढ़ता चला जाएगा। हुड्डा को 2019 में विपक्ष का नेता होने के नाते सरकार ने सेक्टर-7 स्थित कोठी नंबर-70 अलॉट की थी। नियमों के हिसाब से हुड्डा को यह कोठी नई सरकार का गठन होने के 15 दिनों के भीतर खाली करनी थी। दिसंबर 2024 में हुड्डा को सरकारी आवास खाली करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने कुछ दिन की मोहलत मांगी थी। हालांकि हुड्डा इस कोठी को अपने पास ही रख भी सकते थे, लेकिन इसके लिए पहले उनका कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) का नेता चुना जाना अनिवार्य है।

हरियाणा में 17 अक्टूबर को नई सरकार का गठन हुआ था। नियमानुसार नई सरकार के गठन के 15 दिन के भीतर सभी पूर्व विधायकों, मंत्रियों, चुनाव हार चुके नेताओं को सरकारी आवास खाली करना होता है, ताकि नई सरकार के मंत्रियों को आवास अलॉट किए जा सकें।

इस कारण से नहीं खाली किया आवास

भूपेंद्र हुड्डा को उम्मीद थी कि हाईकमान उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाएगी और वह पुराने आवास में ही रुके रहेंगे। हुड्डा ने इसके लिए 15 दिन का समय मांगा, लेकिन अब करीब 2 महीने से ज्यादा समय हो चुका है। सरकारी कोठी खाली नहीं करने पर सरकार ने हुड्डा के खिलाफ पीनल रेंट की कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक हुड्डा पर 2 लाख से ज्यादा का पीनल रेंट लग चुका है।

मंत्री विपुल गोयल को पसंद थी कोठी

नेता प्रतिपक्ष के नाते भूपेंद्र हुड्डा को अलॉट हुई 70 नंबर कोठी नई सरकार के गठन के बाद मंत्री विपुल गोयल को पसंद आई थी, लेकिन हुड्डा के कोठी खाली नहीं करने पर विपुल गोयल ने दूसरी आवास के लिए आवेदन किया था।

पीनल रेंट हो सकता है माफ

आमतौर पर नेताओं व अधिकारियों के मामलों में पीनल रेंट कम ही दिया जाता है। पीनल रेंट लगने के बाद इसे माफ किए जाने के भी नियम हैं। ऐसे में हुड्डा पर लगाया गया पीनल रेंट भी वसूला जाएगा, इसके चांस बहुत कम है। वे अगर सीएलपी लीडर बन जाते हैं तो विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उन्हें नेता प्रतिपक्ष घोषित कर दिया जाएगा। अब चूंकि वे दस वर्षोँ तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हैं और वरिष्ठ विधायक हैं। ऐसे में उन्हें सरकार यही कोठी फिर से अलॉट भी कर सकती है।

पहले भी कई नेताओं पर लग चुका पीनल रेंट

हुड्डा हरियाणा के पहले ऐसे नेता नहीं हैं, जिन पर पीनल रेंट लगा है। मार्च-2005 से अक्तूबर-2014 तक राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 47 सीटों के साथ पहली बार पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई। उस समय भी हुड्डा सरकार में मंत्री रहे कई नेताओं ने अपनी कोठी खाली नहीं की थी। पूर्व मंत्री व हिसार विधायक सावित्री जिंदल सहित और भी कई ऐसे नेता व अधिकारी हैं, जिन पर पीनल रेंट लग चुका है। हालांकि बाद में सरकार द्वारा पीनल रेंट को माफ भी कर दिया गया।

बीजेपी नेताओं ने दी नसीहत

भूपेंद्र हुड्डा की ओर से सरकारी आवास खाली नहीं करने का मामला गरमा गया है। नायब सरकार में कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को नैतिकता के हिसाब से सरकारी आवाकस को खाली कर देना चाहिए। वह इस समय केवल विधायक हैं, ऐसे में उन्हें विधायक वाली ही सुविधाएं मिलेंगी। वहीं, राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने कहा कि हुड्डा को यह समझना होगा कि कोठी आज नहीं तो कल उन्हें खाली करनी ही होगी।

यह हैं आवास से जुड़े नियम?

किसी भी मंत्री या विधायक को नई सरकार बनने के 15 दिन में सरकारी आवास खाली करना होता है। यदि वह तय समय पर नहीं खाली करता है तो उसके खिलाफ पीनल रेंट की कार्रवाई होती है। पहले महीने मकान खाली नहीं होने पर 50 गुना किराया वसूल किया जाता है। दूसरे महीने में 100 गुना और तीसरे महीने 200 गुना पीनल रेंट वसूला जाता है। इसके बाद भी कोई कोठी खाली नहीं करता है तो फिर चौथे महीने से 400 गुना पीनल रेंट वसूल किया जाता है।

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