CHANDIGARHHARYANA

न्यायमूर्ति शील नागू ने तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का किया विमोचन ।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति अजय कुमार मित्तल भी रहे कार्यक्रम में मौजूद

एमडब्ल्यूबी न्यूज़,चंडीगढ़ । पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय परिसर स्थित प्रमुख पंजाब और हरियाणा बार एसोसिएशन रूम में कानूनी समुदाय ने तीन महत्वपूर्ण कानूनी ग्रंथों के विमोचन का साक्षी बनने का गौरव प्राप्त किया। इस अवसर पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश, श्री न्यायमूर्ति शील नागू ने औपचारिक रूप से तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया। इन पुस्तकों के शीर्षक थे – *”भारतीय न्याय संहिता पर स्ववचन और टिप्पणी”*, *”भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता पर स्ववचन और टिप्पणी”*, और *”भारतीय साक्ष्य अधिनियम पर स्ववचन और टिप्पणी”*।

समारोह की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति अजय कुमार मित्तल ने की। इस समारोह में न्यायिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मोड़ देखने को मिला, क्योंकि इन कानूनी ग्रंथों के माध्यम से पुराने कानूनी ढांचे को एक नई दिशा देने की कोशिश की गई है, जो आधुनिक भारतीय मूल्यों और आवश्यकताओं के अनुरूप हो। इन ग्रंथों के सह-लेखक श्री केके खंडेलवाल, श्री कमलजीत दहिया, श्रीमती अनुस्संह और श्री वरुण चौधरी ने मिलकर हमारे कानूनी ढांचे की गहराई में जाकर इन नए आपराधिक कानूनों के प्रभाव और व्यावहारिकता पर विस्तृत विचार किया है।

इस अवसर पर श्री न्यायमूर्ति शील नागू ने इन नए कोडों को न्याय, समानता और कानून के शासन के सिद्धांतों की एक नई प्रणाली की ओर एक कदम बताया, जो एक लोकतांत्रिक और आधुनिक भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि ये नए कानूनी ढांचे साइबर अपराध, भीड़तंत्र, और आतंकवाद जैसे आधुनिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए सक्षम होंगे।

माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय कुमार मित्तल ने इन कानूनी सुधारों की प्रासंगिकता की सराहना की और इन नई विधियों को लागू करने से कानूनी पेशेवरों के लिए शिक्षा और मार्गदर्शन की एक नई दिशा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उनका मानना था कि इन ग्रंथों से कानूनी पेशेवरों को बेहतर समझ और न्यायिक निष्पक्षता प्राप्त होगी।

कार्यक्रम का संचालन श्री जसदेव सिंह बराड़, कार्यवाहक अध्यक्ष, और श्री थवण सिंह तवाना, मानद सचिव, उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने किया। इस समारोह में बार एसोसिएशन के कई सम्मानित सदस्य भी उपस्थित थे।

श्री खंडेलवाल, जो हरियाणा कैडर के 1985 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में भारत थकाउइ्स और गाइड्स के राष्ट्रीय आयुक्त हैं, ने इन कानूनी ग्रंथों के योगदान पर प्रकाश डाला। उनके लेखन का व्यापक क्षेत्र कानूनी, प्रबंधन और सांस्कृतिक क्षेत्रों में है, और उनके काम ने भारतीय कानून के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए हैं।

यह आयोजन भारतीय कानूनी इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि ये ग्रंथ भारतीय आपराधिक कानून की बदलती परिप्रेक्ष्य को समझने और लागू करने के लिए आवश्यक न्यायशास्त्रीय दृष्टिकोण और व्यावहारिक दृष्टि प्रदान करते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
LIVE NOW