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एक्सक्लूसिव 👉🏽 विपक्ष में रहने के दौरान आंदोलनकारी विज को क्या अपनी सरकार में भी करने होंगे आंदोलन ?

एमडब्ल्यूबी न्यूज़ ,चंडीगढ़ । प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल विज जिनके नाम मात्र से लापरवाह- कामचोर और भ्रष्टाचारी कर्मचारी थरथर कांपते थे, जिनके किसी जिले में एंट्री मात्र से अधिकारियों में ख़ौफ़ पैदा हो जाता था कि कहीं मेरे विभाग का अचानक औचक निरीक्षण ना कर बैठे, जो अनिल विज आमजनमानस तथा पीड़ित वर्ग के लिए एक मसीहा और एक आखिरी उम्मीद माने जाते थे वह अनिल विज आज मीडिया से बातचीत के दौरान काफी बेबस एवं बेहद दुखी नजर आए। उनके शब्द उनके अंदर के दर्द को ब्या कर रहे थे, उनके चेहरे पर अपनी जनता की दुख तकलीफों को दूर न कर पाने की पीड़ा थी, उनका एक-एक शब्द यह बता रहा था कि वह बहुत कुछ करना चाहते हैं लेकिन नहीं कर पा रहे। आखिर ऐसा क्या बोल गए अनिल विज।

अनिल विज ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि मैं अंबाला छावनी के लिए सोमवार को जनता दरबार लगाता था, मैंने बंद कर दिया है, ग्रीवेंस कमेटी में भी शायद मैं नहीं जाया करूंगा, क्योंकि हमारे आदेशों की पालना नहीं होती। अधिकारी हमारे काम नहीं कर रहे। बाकि हरियाणा का तो मैंने कुछ नहीं लेना। लेकिन अंबाला छावनी की जनता ने मुझे 7 बार विधायक बनाया है। उनके कामों के लिए अगर मुझे आंदोलन भी करना पड़े तो मैं आंदोलन भी करूंगा। अगर डलेवाल की तरह मुझे आमरण अनशन भी रखना पड़ा तो मैं वह भी रखूंगा।

यह कुछ लाइने बेहद गहरे संदेश और दुख की ओर साफ इशारा कर रही थी। राजनीतिक पंडितों ने
साफ इशारा बदले सियासी माहौल की तरफ दिया। जिस प्रकार से कुछ समय पहले प्रदेश की सियासत ने अचानक एक बड़ी करवट ली, पुराने समय से बेहद मुखर -बेबाक और डिसीजन मैन की पहचान रखने वाले अनिल विज को जिस प्रकार से राजनीतिक उतार चढ़ाव देखने पड़े, कैबिनेट स्तर के ताकतवर मंत्री व भाजपा में सबसे बड़े कद के नेता माने जाने वाले अनिल विज को मंत्री तक नहीं बनाया गया था, उससे साफ नजर आने लगा था कि अनिल विज कुछ लोगों की आंखों को नही भा रहे हैं।

संघ की कई शाखाओं में बेहद निष्ठता से कार्य करते रहे हैं विज

अपनी पूरी उम्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को समर्पित कर देने वाले अनिल विज अंबाला छावनी के अजय प्रत्याशी के रूप में जाने जाने वाले नेता हैं। पूरे प्रदेश के कोने कोने में एक बड़ी संख्या उनके चाहने वाले लोगों की है। अपनी कॉलेज की पढ़ाई के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में अनिल विज शामिल हुए थे। बेहद आक्रामक भाषाशैली, कड़े तेवरों व युवाओं में एक बड़ी पकड़ बना चुकने के दम पर 1970 में उन्हें एबीवीपी का महासचिव बनाया गया। विश्व हिंदू परिषद, भारत विकास परिषद जैसे कई संगठनों में उनकी भूमि का बेहद सक्रिय रही है। संघ की विचारधारा से बेहद प्रभावित रहने वाले विज ने संगठन में बहुत से युवाओं को जोड़ने का काम किया था। 1974 में भारतीय स्टेट बैंक में नौकरी लग जाने के बावजूद वह संघ तथा पार्टी के हर कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे।

सरकारी नौकरी का त्याग कर राजनीति में विज की कैसे हुई एंट्री

अंबाला छावनी की विधायक सुषमा स्वराज के अचानक निधन के पश्चात विज की लोकप्रियता और आक्रामक स्टाइल को देखते हुए जबरदस्ती पार्टी ने उपचुनाव के लिए तैयार किया। नौकरी न छोड़ने की चाहत के बावजूद संघ के मुख्य किरदारों के कहने के कारण उन्हें सरकारी सेवाओं से रिजाइन कर चुनाव लड़ना पड़ा और जिस दौरान भाजपा का नाम लेवा भी प्रदेश में कहीं-कहीं था, उन्होंने एक बड़े अंतर से भाजपा की झोली में अंबाला छावनी की सीट डालने का काम किया। भारतीय जनता पार्टी ने 1991 में उन्हें युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनाने का बड़ा निर्णय लिया। अचानक सियासी माहौल बदलने के कारण उन्होंने 1996 और 2000 में निर्दलीय तौर पर अंबाला छावनी से चुनाव लड़ा और जीता। अन्य कई राजनीतिक दलों से बड़े-बड़े ऑफर आने के बावजूद उनकी निष्ठा तथा समर्पित भाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा में ही रही। निर्दलीय तौर पर जनता की आवाज को बुलंद करने वाले अनिल विज ने किसी भी अन्य राजनीतिक दल का दामन नहीं थामा।

जानकारी अनुसार विपक्षी दलों द्वारा कई बार उन्हें कैबिनेट मंत्री के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री की ऑफर तक की गई। लेकिन अपने असूलों के साथ कभी समझौता न करने वाले अनिल विज ने प्रदेश के इन सभी पदों तक को ठुकरा दिया। आखिरकार फिर से समय ने करवट ली और उनकी लोकप्रियता और पार्टी समर्पण को मानते- समझते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दखल से वह फिर भाजपा में शामिल हुए। 2009- 2014- 2019 में विधायक बनने के बाद 2024 में सातवीं बार अंबाला छावनी की जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि बनाया।

कई बार आक्रामक भाषाशैली के कारण अनिल विज को तत्कालीन स्पीकर में निकाला था बाहर

अनिल विज एक बड़ा लोकप्रिय चेहरा हैं। जिस वक्त भारतीय जनता पार्टी प्रदेश की ना के बराबर पसंद थी, इंडियन नेशनल लोकदल और कांग्रेस पार्टी यहां पूरी तरह से वर्चस्व रखती थी, उस वक्त भी अनिल विज का रुतबा विपक्ष में रहने के बावजूद किसी ताकतवर मंत्री से कम नहीं था। वह केवल अन्य अधिकतर नेताओं की तरह केवल विधायक बनकर विधानसभा में खाना पूर्ति ही नहीं करते थे, विधानसभा में सरकार के खिलाफ सबसे अधिक बोलने वाले, सरकार की कार्यशैली पर सबसे अधिक सवालिया निशान लगाने वाले विधायक अनिल विज ही रहते थे। बेहद सटीक प्रमाणों के साथ वह अपनी बात को विधानसभा में रखते थे। तत्कालीन विधानसभा स्पीकरों द्वारा कई बार उनके आक्रामक व्यवहार से नाराज विधानसभा से बाहर तक निकाला गया।

कोविड-19 वैक्सीन के लिए स्वेच्छा से आगे आने वाले पहले व्यक्ति थे अनिल विज

इनकी एक ओर बात पूरे प्रदेशभर में सुप्रसिद्ध थी। विपक्ष में रहने के दौरान उनकी स्विफ्ट डिजायर गाड़ी में एक दरी हमेशा रखी रहती थी। जब भी कहीं जनता के साथ अन्याय इन्हें दिखता था तो तुरंत प्रभाव से एक कुशल राजनीतिज्ञ तथा जनता के सच्चे प्रहरी के रूप में यह अपनी दरी को निकालकर मौका स्थल पर बैठ जाते थे और उनके पीछे जनता उम्र उठती थी। कई बड़े मामलों में इनकी दरी का चमत्कार देखा गया और जनता को इंसाफ मिला।

इसी प्रकार सरकार भारतीय जनता पार्टी की 2014 में सरकार बहुमत के साथ बनी और इन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया तो पूरे प्रदेश भर की जनता के लिए जनता दरबार खोल दिया गया जो कि रात को 2-2,3-3 बजे तक भी चला और प्रदेश के कोने-कोने से हजारों की संख्या इस जनता दरबार में पहुंची और मौके पर ही बहुत से मामलों को सुलझाया गया। लोगों को इंसाफ दिया गया।

जिस कारण से उनकी लोकप्रियता का डंका न केवल प्रदेश में बल्कि आसपास के प्रदेशों में भी खूब बजा। इनकी तुलना देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से भी कुछ लोग करने लगे थे। देश में कोरोना जैसे भयंकर संक्रमण के दौरान प्रदेश के दो महत्वपूर्ण स्वास्थ्य और गृह विभाग अनिल विज के पास ही थे और सबसे अहम किरदार इन दोनों विभागों का ही था।

जिस वक्त प्रदेश के अन्य नेता और मंत्री अपने घरों में दुबके बैठे थे, उस दौरान भी अनिल विज रोजाना चंडीगढ़ अपने कार्यालय में पहुंचकर अधिकारियों की बैठक लेते थे और आवश्यक दिशा निर्देश देते थे। जनता की सेवा के दौरान कई बार अनिल विज कोरोना संक्रमित भी हुए। बावजूद इसके अस्पताल में उपचाराधीन रहने के दौरान भी अधिकारियों की बैठक अस्पतालों में इनके नेतृत्व में चली।

जनता के प्रति समर्पण भाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोविड-19 वैक्सीन के लिए राज्य में स्वेच्छा से आगे आने वाले पहले व्यक्ति अनिल विज ही थे जिन्हें ट्रायल डोज दी गई। इससे बड़ा बलिदान शायद किसी व्यक्ति का हो सकता है। उस दौरान प्रदेश के हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचा इसका श्रेय अनिल विज को काफी हद तक जाता है।

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