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पंजाब सरकार का बड़ा एक्शन: 14 तहसीलदार सस्पेंड, सामूहिक हड़ताल पर थे

चंडीगढ़। पंजाब में तहसीलदारों की हड़ताल को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सख्त चेतावनी के बाद भी काम पर न लौटने वाले 14 तहसीलदारों को निलंबित कर दिया गया है। ये अधिकारी सेल्स डीड (बिक्री दस्तावेज) रजिस्टर करने से मना कर रहे थे, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही थी।

 

हड़ताल पर सरकार की कड़ी कार्रवाई

विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई के विरोध में तहसीलदारों ने सामूहिक अवकाश की घोषणा कर दी थी और शुक्रवार तक काम न करने का फैसला लिया था। इस पर सीएम भगवंत मान ने सुबह ही सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि यदि अधिकारी शाम 5 बजे तक ड्यूटी पर नहीं लौटे, तो उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा।

 

सीएम की चेतावनी के बाद कई जिलों में तहसीलदारों ने वापस काम शुरू कर दिया, लेकिन कुछ अधिकारियों ने सरकार के आदेश को नजरअंदाज किया। इसके बाद, पंजाब सरकार ने 14 तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

 

सीएम भगवंत मान का कड़ा संदेश

 

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

“जनता के काम में देरी या ब्लैकमेलिंग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकारी अधिकारी यदि अपनी ड्यूटी नहीं निभाएंगे, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। लोग तय करेंगे कि ये अधिकारी छुट्टी के बाद कहां नौकरी करेंगे।”

 

इसके अलावा, सीएम भगवंत मान ने खरड़, बनूड़ और जीरकपुर सहित कई तहसीलों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि सरकार किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार और मनमानी को बढ़ावा नहीं देगी।

 

संगरूर, मोहाली और मोगा में अधिकारी लौटे

समय सीमा समाप्त होने से पहले मोहाली, संगरूर और मोगा सहित कई जिलों में तहसीलदार वापस लौट आए और काम शुरू कर दिया। हालांकि, जो अधिकारी अभी भी ड्यूटी पर नहीं लौटे थे, उन्हें निलंबित कर दिया गया।

 

सरकार का सख्त संदेश: हड़ताल नहीं चलेगी

पंजाब सरकार ने कहा कि यह हड़ताल और सामूहिक अवकाश का फैसला जबरदस्ती और ब्लैकमेलिंग के समान है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार के इस कड़े फैसले से राज्य के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

 

क्या है तहसीलदारों की हड़ताल की वजह?

तहसीलदारों का कहना है कि विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई के चलते वे दबाव में हैं और उन्होंने इस कार्रवाई के विरोध में सामूहिक अवकाश लिया था। हालांकि, सरकार का मानना है कि यह सिर्फ काम में रुकावट डालने की साजिश है।

 

अब देखने वाली बात यह होगी कि निलंबित तहसीलदारों को लेकर सरकार आगे क्या कदम उठाती है और क्या अन्य अधिकारी अब भी विरोध जारी रखते हैं या नहीं।

 

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